NSDC सिर्फ एक वित्त प्रदान करने वाली संस्था के तौर पर हीं कार्य नहीं करती बल्कि इस बात का भी ख्याल रखती है की उद्यम से जुडी अन्य आवश्यकताओं को ही पूरा करने में वो भरपूर सहयोग करे। प्रत्येक क्षेत्रानुसार प्रशिक्षण हेतु विषयों का विकास, प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा उनकी गुणवत्ता का ध्यान रखना भी NSDC के कार्यक्षेत्र में शामिल है। NSDC की यह भी योजना है की वो जल्द हीं औद्योगिक संघो के साथ मिलकर गुणवत्ता के मानकों के निर्धारण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करे।
NSDC को इस बात के लिए भी जिम्मेदार बनाया गया है की वह विभिन्न औद्योगिक जरूरतों के लिए किस प्रकार के कौशल की आवश्यकता है इसे पहचाने तथा उनके प्रशिक्षण के लिए पूरी ज़मींन तैयार करे। इसके लिए भिन्न-भिन्न सेक्टरों के लिए अलग-अलग कौशल परिषदों (SSCs) की स्थापना की भी NSDC की योजना है। प्रशिक्षण प्रक्रिया को क्षेत्रानुसार केन्द्रित करने के लिए 'श्रमिक बाज़ार सूचना प्रणाली (LMIS) की स्थापना के लिए भी NSDC कटिबद्ध है। इससे प्रशिक्षण की योजना बनाते वक़्त सही आंकड़ो तक NSDC की पहुँच बनाने में मदद मिलेगी।
विभिन्न कौशल परिषदों (SSCs) को ऐसी इकाई के तौर पर विकसित करने की योजना है जो कौशल की जरूरतों तथा गुणवत्ता के मानकों का आकलन सिर्फ एक इकाई के लिए नहीं बल्कि पूरे सेक्टर के लिए करे। इससे एक क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न इकाईयों के श्रमिकों की कार्यक्षमता की तुलना के आकलन में मदद मिलेगी, जो प्रशिक्षण तथा विभिन्न श्रमिकों के कार्यों की रूपरेखा तैयार करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जब इन परिषदों (SSCs) के पास सारे आंकड़े रहेंगे तो इन्हें श्रमिक बाज़ार में ही रहे परिवर्तनों की भविष्यवाणी तथा पूरे सेक्टर में समान स्तर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
वित्तीय संसाधन