केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट भाषण (2008-2009) में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के गठन की घोषणा की। घोषणा के वक़्त कहे गए उनके शब्द:
"आज कौशल विकास कार्यक्रम किसी एक क्षेत्र तक सिमित नहीं है बल्कि कई मंत्रालय तथा विभाग इसकी देख-भाल कर रहे हैं। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है की मैं वैसे कार्यक्रमों में हस्तक्षेप करूं जो एक क्षेत्र-विशेष के लिए कौशल विकास कार्यक्रम में संलग्न हैं। फिर भी हमारी विकासशील अर्थव्यवस्था को एक ऐसे कार्यक्रम की आवश्यकता यक़ीनन है जो कौशल विकास कार्यक्रम को एक लक्ष्य के रूप में लेकर इस पर कार्य करे। इस कार्यक्रम का नेतृत्व तथा ढांचागत व्यवस्था भी इस प्रकार की होनी चाहिए की इसे इच्छानुसार समस्त भारत में लागु किया जा सके। इसलिए मैं एक ऐसे निगम की स्थापना का प्रस्ताव रखता हूँ जो बिना मुनाफे के कार्य करे तथा कौशल विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान से जुट जाये। मेरा इरादा है की मैं विभिन्न सरकारों, सरकारी उपक्रमों, निजी क्षेत्र के उपक्रमों, द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय स्त्रोतों से 15,000 करोड़ रुपये इस निगम की मूल पूँजी के रूप में इकट्ठा करूं। इस निगम की शुरूआती पूँजी के लिए मैं केंद्र सरकार की भागीदारी के रूप में 1000 करोड़ रुपये के योगदान की घोषणा करता हूँ........."
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तावित बिना मुनाफे के कार्य करने वाला यह निगम हीं राष्ट्रीय कौशल विकास निगम अथवा NSDC के रूप में स्थापित हुआ।
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