माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी दीप प्रज्ज्वलित करते हुए
NSDC निदेशक मंडल के सदस्य श्री कुमार गेरा, माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी, वित्त मंत्री की सलाहकार सुश्री ओमिता पॉल, श्री अशोक चावला, सचिव, वित्त मंत्रालय तथा NSDC निदेशक मंडल के सदस्य श्री दिलीप चेनॉय
NSDC निदेशक मंडल के सदस्य श्री दिलीप चेनॉय
श्री रघुत्तमा राव, प्रबंध निदेशक, IMaCS
माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी तथा NSDC के चेयरमैन श्री एम. वि. सुबिआह
माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए
माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्ज
माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी, NSDC के चेयरमैन श्री एम. वि. सुबिआह तथा श्री अशोक चावला, सचिव, वित्त मंत्रालय कौशल की मांग तथा उपलब्धता में अंतर पर रिपोर्ट का विमोचन करते हुए
माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी तथा NSDC के चेयरमैन श्री एम. वि. सुबिआह
केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने आज दिनांक 21 अक्टूबर 2009 को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) का शुभारम्भ किया। यह संस्था निजी तथा सरकारी क्षेत्र की साझेदारी में चलने वाली अपने तरह की एकमात्र संस्था है जिसे ये दिशा-निर्देश दिए गए हैं की वो सन् 2022 तक 50 करोड़ श्रमिको को कुशल बनाने का जो लक्ष्य रखा गया है उसके 30 % को वो प्राप्त करे। NSDC वित्त मंत्रालय के अंतर्गत बिना मुनाफे के कार्य करने वाली एक संस्था है जिसकी स्थापना कम्पनी एक्ट 1956 के सेक्शन 25 के तहत की गयी है। इस संस्था में निजी तथा सरकारी साझेदारी क्रमशः 51 % तथा 49 % है। वित्त मंत्रालय के साथ-साथ प्रमुख औद्योगिक संगठनों ने भी इस संस्था की शुरूआती पूँजी में अपना योगदान किया है।
वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने NSDC के शुभारम्भ के वक़्त जो शब्द कहे वो इस प्रकार हैं:
"राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की आज औपचारिक रूप से शुरुआत हो गयी और आज इस शुभारम्भ समारोह में आकर मुझे बड़ा हीं हर्ष महसूस हो रहा है। आज संतुष्टि के साथ मैं यह कह सकता हूँ कौशल विकास के क्षेत्र में जो निजी तथा सरकारी क्षेत्र का ये जो मॉडल तैयार किया गया है इसकी जड़े बड़ी हीं मजबूत ज़मीन पर रखी गयी हैं। और जो महत्वकांक्षी भूमिका इसके लिए सोची गयी है उसे निभाने के लिए यह पूर्णतया तैयार है। यहाँ उपस्थित विभिन्न प्रतिनिधियों के लिए यह बड़ा हीं लाभकारी होगा अगर इस बात की चर्चा की जाये की NSDC की स्थापना किस परिपेक्ष्य में की गयी है।
"माननीय प्रधानमंत्री द्वारा कौशल विकास के लिए स्थापित राष्ट्रीय मिशन ने कौशल विकास के कार्य को अंजाम देने के लिए तीन स्तरीय ढाँचे की कल्पना की है। ये ढांचे हैं: कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय परिषद्, राष्ट्रीय कौशल विकास समन्वय मंडल तथा NSDC। कौशल विकास के मूल सिद्धांत, जिन पर विकास की पूरी रणनीति आधारित होगी, की स्थापना का कार्य राष्ट्रीय परिषद् को सौंपा गया है। समन्वय मंडल को इस बात के लिए जिम्मेदार बनाया गया है की कौशल विकास के क्षेत्र में विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों द्वारा जो भी प्रयास किये जा रहे हैं उन्हें एक लय में पिरोये। NSDC को बड़ा ही महत्त्वपूर्ण कार्य ये दिया गया है की वो निजी क्षेत्र की इकाईयों द्वारा इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों तथा विभिन्न सरकारी महकमों द्वारा किये जा रहे प्रयासों को एक साथ जोड़े। विशेष तौर पर NSDC को जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं वो ये हैं की वह निजी क्षेत्र द्वारा कौशल विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहन दे तथा विभिन्न इकाईयों में समन्वय बिठाये, जिससे प्रधानमंत्री के कौशल विकास परिषद् के मूल उद्देश्यों की प्राप्ति सरलता तथा शीघ्रता से हो।
"प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित परिषद् ने कौशल विकास के तत्काल प्राप्त किये जा रहे लक्ष्यों को बिल्कुल अपर्याप्त पाया है तथा इसे और महत्वाकांक्षी करने की सख्त जरूरत महसूस की है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सन् 2022 तक 50 करोड़ लोगों को कुशल श्रमिकों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य तय किया गया है जो अभी सिर्फ 4 करोड़ है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सबसे पहले ये आवश्यक है की प्रशिक्षण क्षमता में युद्ध स्तर पर कार्य कर के इसमें वृद्धि की जाये तथा इसे विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया जाये। परिषद् ने यह भी महसूस किया है की इन प्रशिक्षणों का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे अर्थात इन प्रशिक्षणों द्वारा सभी प्रकार के भेद-भाव जैसे लिंग भेद, ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के भेद, संगठित तथा असंगठित क्षेत्रों के भेद-भाव तथा परंपरागत तथा आधुनिक कार्य-स्थलों के भेद-भावों को भी मिटा दिया जाये। परिषद् ने जो मूल उद्देश्य तय किये हैं उन्हें प्राप्त करने के लिए यह भी आवश्यक है की निजी क्षेत्र को उसमे बराबर का भागिदार बनाया जाये जो इस प्रक्रिया को अमल में लाने में सहायक सिद्ध होगा। उल्लिखित बातों को जानकर यह एहसास तो हो हीं जाता है की NSDC भारत में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता की तस्वीर को एक नया आयाम देने में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है।
"जब जुलाई 2008 में NSDC की नीव राखी गयी थी तभी से ये संस्था निजी क्षेत्र की कौशल विकास में सहभागिता को लेकर प्रयासरत है और खुद को इस प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में इसने प्रस्तुत किया है। इसके निदेशक मंडल की भी समय-समय पर बैठकें होती रही हैं जिससे श्रमिकों के कौशल तथा प्रतियोगिता स्तर में जो कमियां हैं उन्हें दूर करने के उपायों की ढांचागत रचना हो सके। भविष्य में उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की माँग तथा उपलब्धि में विशाल अंतर होने का जो अध्ययन आज पेश किया गया है वो अपने आप में एक मिसाल है। इसमें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की होने वाली कमियों को बड़ी हीं सूक्ष्मता से दर्शाया गया है। मैं इस बात से भी बड़ा प्रसन्न हूँ की NSDC की शासनात्मक व्यवस्था, आधारभूत रचना तथा रणनीति भी बिल्कुल स्पष्ट कर दी गयी है। NSDC ने अपने लिए सन् 2022 तक 15 करोड़ श्रमिकों को प्रशिक्षित करने का जो लक्ष्य तय किया है वह राष्ट्रीय परिषद् द्वारा तय किये गए लक्ष्यों के साथ ताल-मेल बिठाए हुए है और यह बड़े हीं हर्ष की बात है। एक संतुष्टि की बात यह भी है की NSDC ने उन क्षेत्रों को प्राथमिकता के तौर पर रखा है जिन्हें पारंपरिक रूप से 'असफल बाज़ार' की संज्ञा दी गयी है। ये क्षेत्र हैं पिछड़े इलाके, समाज के पिछड़े वर्ग, तथा असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले श्रमिक। तीन परियोजनाओं को पहले से हीं स्वीकृति दे दी गयी है तथा ये तत्काल प्रभाव से आगे के कार्य की ओर कदम बढ़ा रहीं हैं; मैं मानता हूँ की यह NSDC के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मैं ये उम्मीद करता हूँ की की ये परियोजनाएं सन् 2016 तक 20 लाख कुशल श्रमिकों की एक बड़ी तादाद तैयार करने में सफल होंगी। NSDC के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए की उसने सिर्फ एक वर्ष की छोटी सी अवधि में कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी एक पहचान बना ली है तथा भविष्य में अपनी भूमिका के लिए स्पष्ट रणनीति भी तय कर ली है। इस सफलता पर मैं NSDC के निदेशक मंडल को दिल से बधाई देना चाहूँगा।
"हालाँकि आने वाले समय में NSDC के रास्ते कठिन अवश्य हैं और इसे कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है, परन्तु हमारी सरकार ने NSDC से बहुत उम्मीदें लगा रखी हैं और मैं आशा करता हूँ की अगले छः महीने तथा उससे आगे आने वाले समय में भी NSDC उन्हें हासिल कर के दिखायेगी। दो क्षेत्रों जिन पर NSDC से शीघ्रातिशीघ्र क्रियान्वन की अपेक्षा की जा रही है वो हैं विभिन्न विभागों तथा मंत्रालयों द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों को एक लय में पिरोना तथा क्षेत्रानुसार कौशल परिषदों (SSCs) की स्थापना करना। ये जिम्मेदारी NSDC को कौशल विकास की राष्ट्रीय निति तय करते वक़्त भी दी गयी थी।
"भारत सरकार के 17 भिन्न-भिन्न मंत्रालय तथा विभाग कौशल विकास कार्यक्रम को अपने ढंग से चला रहे हैं तथा इन कार्यक्रमों के लिए बजट में बड़ी मात्रामें वित्त का प्रावधान भी किया गया है । जनहीत में यह आवश्यक होगा की NSDC के कार्यक्रम इन विभागों द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों के बिल्कुल प्रतिरूप न हो। इस तरह संसाधनों का सही दिशा में इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार के पास ऐसे कई संसाधन हैं जिनका सही ढंग से इस्तेमाल नहीं हो रहा है इसलिए यह भी आवश्यक है की NSDC तथा सरकार के बीच एक परस्पर तालमेल बिठाया जाये जिससे ये संसाधन निजी क्षेत्र के लिए एक उत्प्रेरक का कार्य करें। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए NSDC को अपने कुछ कार्यक्रमों को इस प्रकार चलाना चाहिए की कई मंत्रालय तथा विभाग इससे लाभ उठा सके और अपने क्षेत्रानुसार इस्तेमाल कर सकें। दो ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें विचार के लिए तत्काल प्रभाव से लिए जाने की उम्मीद NSDC से की जा रही है और इनमे पहला है कुछ ITI का NSDC के द्वारा प्रबंधन के लिए लिया जाना ना की पूरी तरह अधिग्रहण करना। इस तरह पहले से उपलब्ध ढांचागत सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन का एक मॉडल तैयार हो सकेगा। दूसरा है कपड़ा मंत्रालय के साथ समन्वय बिठाते हुए उस क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करते वक़्त बेहतरीन तकनिकी-प्रबंधकीय क्षमता का इस्तेमाल करना। ये दो क्षेत्र तो सिर्फ इशारा भर हैं, मूल उद्देश्य है इस मॉडल को वैसे दुसरे कार्यक्रमों के साथ भी लागू करना जो विभिन्न मंत्रालयों जैसे ग्रामीण विकास मंत्रालय, अति-लघु, छोटे तथा मझोले उद्यमों का मंत्रालय एवं महिला तथा बाल विकास मंत्रालय के अधीन आते हैं।
"कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय निति में NSDC के लिए एक बड़े हीं महत्त्वपूर्ण कार्य की कल्पना की गयी है और वो है क्षेत्रानुसार विभिन्न कौशल परिषदों (SSCs) का गठन। इन कौशल परिषदों की स्थापना के पीछे उद्देश्य यह है की यह विभिन्न प्रकार के कार्यों को अंजाम देंगे। इन कार्यों में प्रमुख हैं प्रतियोगिता स्तर तथा योग्यता का निश्चय, प्रशिक्षण हेतु विषयों का विकास, परीक्षा एवं प्रमाणन तथा मान्यता प्रदान किये जाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना। आज यह सारे कार्य व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए गठित राष्ट्रीय परिषद् (NCVT) करती है जो श्रम मंत्रालय के अंतर्गत आती है। विभिन्न ITI तथा ITCs को सम्बद्ध करने का कार्य भी NCVT के जिम्मे है। अभी ऐसी को निश्चित स्थापित प्रणाली नहीं है जो प्रशिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रदान करे। इस दिशा में जो थोड़े बहुत कार्य करती है वह है गुणवत्ता परिषद्, जो औद्योगिक निति तथा प्रोत्साहन विभाग (DIPP) के शासनाधीन आती है। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो इस बात की अत्यधिक जरूरत है की विभिन्न क्षेत्रों के लिए कार्यस्तर, प्रशिक्षण हेतु विषयों का विकास तथा प्रमाणन प्रणाली एवं विश्वास योग्य मान्यता प्रदान करने वाली संस्थाओं का विकास हो। जिन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है वो हैं गृहनिर्माण एवं ढांचागत निर्माण उद्योग, वाहन उद्योग तथा आभूषण एवं कीमती पत्थर का उद्योग। कौशल विकास की राष्ट्रीय निति के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए NSDC तत्काल प्रभाव से क्षेत्रानुसार विभिन्न कौशल परिषदों का गठन कर सकती है। ये परिषद् एक निश्चित अवधि के अन्दर कई कार्यों को अंजाम देंगे जो इस प्रकार हैं: अपने क्षेत्र के अनुसार प्रशिक्षण हेतु विषयों का निर्धारण तथा उनका स्तर तय करना, परीक्षा एवं प्रमाणन तथा मान्यता की क्षमता तय करने में सरकार की मदद करना।
"अंत में मैं NSDC को सरकार की तरफ से यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ की हमारी भूमिका NSDC को एक समर्थवान तथा सुचारू रूप से काम करने वाली संस्था को बनाने की होगी जिससे यह एक निश्चित अवधि में अपने दिशा-निर्देशों का ठीक से पालन कर सके। हमारी सरकार इस प्रयास को हर तरह से समर्थन देने के लिए भी कटिबद्ध है। मैंने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं की वो NSDC के निदेशक मंडल के सदस्यों के संपर्क में रहें तथा उनके जो भी कार्य हों उन्हें प्राथमिकता देते हुए निपटाएं। मैंने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं की वो वित्त प्रदान करने वाली द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय इकाईयों से रिश्ता कायम करे ताकि NSDC को कभी वित्त की कमी न महसूस होने पाए और इसके कार्य सुचारू रूप से चलते रहें।
"आज में यह दावे के साथ कह सकता हूँ की जल्द हीं NSDC माननीय प्रधानमंत्री के कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय मिसन द्वारा तय लक्ष्यों को प्राप्त कर के दिखायेगी क्योंकि इसमें सरकारी प्रतिबद्धता के साथ-साथ निजी क्षेत्र की उत्साहवर्धक गतिशीलता भी है।"
हमारी भूमिका