NSDC ख़बरों में
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NSDC द्वारा वित्त प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू

NSDC तथा B-ABLE की टीम

NSDC निदेशक मंडल के सदस्य श्री दिलीप चेनॉय तथा B-ABLE के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुशिल रमोला अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए 

NSDC निदेशक मंडल के सदस्य श्री चंद्रजीत बनर्जी तथा GJEPC के उपाध्यक्ष श्री राजीव जैन अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए

NSDC तथा GJEPC की टीम

भारत की कौशल की जरूरतों को पूरा करने में निजी क्षेत्र की भूमिका महत्त्वपूर्ण: सुबिआह

राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने आज नई दिल्ली में वित्त प्रदान करने की प्रक्रिया की शुरुआत की। इस अवसर पर बोलते हुए NSDC के चेयरमैन श्री एम. वि. सुबिआह ने इससे लाभान्वित संस्थाओं की घोषणा की। उनके कहा, 'GJEPC तथा बेसिक्स अकेडमी ऐसी दो संस्थाएं हैं जिनका चुनाव NSDC द्वारा पहले-पहल वित्त प्रदान करने के लिए किया गया है। मैं इस बात के लिए बिलकुल आश्वस्त हूँ की भारत में कौशल विकास के कठिन कार्य को अंजाम देने के लिए इन संस्थाओं द्वारा व्यवसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में जो प्रयास किये जा रहे हैं उनके दूरस्थ और काफी अच्छे परिणाम होंगे।'

अब तक NSDC ने 45.38 करोड़ रूपये मूल्य के तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है तथा यह उम्मीद की जा रही है की इन परियोजनाओं के क्रियान्वन से 10.5 लाख कुशल श्रमिकों की उपलब्धता का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा। यह लक्ष्य 10 वर्षों में करीब 1 लाख प्रति वर्ष की दर से प्राप्त किये जाने की संभावना है। इसके अतिरिक्त ऐसी और भी परियोजनाएं हैं जो विचार करने की अग्रिम अवस्था में हैं तथा जिनसे कुशल श्रमिकों की संख्या में वृद्धि करने में बहुत मदद मिलेगी । इन कुशल श्रमिकों में प्रशिक्षकों का भी काफी तादाद होने का अनुमान है।  

राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) औपचारिक रूप से 20 अक्टूबर 2009 को अस्तित्व में आया और तभी से इसके वेबसाइट पर ये विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं की कैसे NSDC से सहयोग लेने के इच्छुक प्रशिक्षण संस्थान अपने प्रस्ताव पत्र सम्मिलित कर सकते हैं। NSDC को सरकार द्वारा यह दिशा-निर्देश दिया गया है की सन् 2022 तक वह 15 करोड़ (राष्ट्रीय लक्ष्य का 30 प्रतिशत) प्रशिक्षित श्रमिकों के लक्ष्य को प्राप्त करे। इस लक्ष्य में नए श्रमिकों का प्रशिक्षण तथा पहले से कुशल श्रमिकों के कौशल में इजाफा करना भी शामिल है। NSDC ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है तथा 21 अलग-अलग उच्च विकास की क्षमता वाले क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की मांग तथा उपलब्धता पर अध्ययन पूरा किया जा चूका है। इस अध्ययन से मांग तथा उपलब्धता के अंतर को पाटने की रणनीति का ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। 

NSDC द्वारा प्रदत्त वित्त से लाभान्वित होने वाली संस्था रत्न एवं आभूषण निर्यात प्रोत्साहन परिषद् (GJEPC) ने भारतीय रत्न एवं आभूषण संस्थान जयपुर (IIGJJ) की स्थापना का प्रस्ताव रखा है। यह संस्थान जयपुर के सीतापुरा इलाके में स्थित रत्न एवं आभूषण के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थापित किया जायेगा। इस प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य होगा आभूषण की बनावट एवं निर्माण क्षेत्र के लिए कुशल श्रमिकों की एक बड़ी संख्या तैयार करना तथा उत्तम दर्जे के परिक्षण तथा शोध एवं विकास (R & D) संस्थान का विकास करना जो रत्न एवं आभूषण उद्योग से सम्बंधित कार्यों के लिए शोध करे। यह संस्थान अति-आधुनिकतम मशीनों, प्रशिक्षण के सामानों तथा अन्य ढांचागत सुविधाओं से सुसज्जित होगा जिससे इसे SEZ से जुडी सारी मांगों को पूरा करने में सहूलियत होगी। अगले 10 वर्षों में यह अनुमान है की IIGJJ तक़रीबन 18,000 कारीगरों, तकनीशियनों तथा इस क्षेत्र से जुड़ने वाले नए लोगों को प्रशिक्षित करेगी। जहाँ तक निर्यात से जुड़ी आय का सवाल है तो भारत के कुल निर्यात आय का 13 प्रतिशत हिस्सा रत्न एवं आभूषण के निर्यात से आता है।

NSDC की वित्तीय मदद से लाभान्वित होने वाली दूसरी संस्था बेसिक्स अकेडमी फॉर लाइफलॉन्ग एम्प्लोय्बिलिटी (B-ABLE) है जो दिल्ली की बेसिक्स अकेडमी की एक सहायक संस्था है। इस संस्था द्वारा अगले 10 वर्षों में 10 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का अनुमान है। B-ABLE की यह योजना है की वह पूरे भारत में अपने प्रशिक्षण संस्थान खोले। ये संस्थान स्थानीय प्रबंधन के द्वारा चलाये जायेंगे। इस संस्थानों में इस बात पर बल दिया जायेगा की वह सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं के कौशल विकास पर ज्यादा ध्यान दे। प्रशिक्षण हेतु इसने 6 क्षेत्रों का चुनाव किया है, वो क्षेत्र हैं: गृह एवं ढांचागत निर्माण, पर्यटन तथा होटल उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग तथा बीमा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, ग्रामीण क्षेत्र के कृषि तथा गैर कृषि उद्योग। इसमें यह भी ध्यान रखा जायेगा की प्रशिक्षण आधुनिक अध्यापन-कला का इस्तेमाल करते हुए दिया जाये जिससे कौशल विकास के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आत्म-सम्मान का संचार हो सके।

ग्रामीण क्षेत्र में इस परियोजना को लागू करने के लिए एक संस्था के साथ स्वीकृति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जा चुके है। यह संस्था है ग्राम तरंग तथा इसे उड़ीसा के सेंचुरियन ग्रुप द्वारा आगे बढाया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य है मूलतः उस क्षेत्र के युवाओं में कौशल विकास करना जो नक्सल प्रभावित हैं। कुछ मुख्य क्षेत्र जिनमे इस परियोजना के तहत प्रशिक्षण दिया जायेगा वो हैं: विभिन्न वस्तु निर्माण, गृह तथा ढांचागत निर्माण, सिलाई, पानी के पाईप तथा नल से सम्बंधित कार्य, कपड़ा उद्योग, असंगठित क्षेत्र तथा खुदरा-विक्रय क्षेत्र। इस परियोजना से अगले 5 वर्षों में 21,000 लोगों को प्रशिक्षित किये जाने का अनुमान है।

नई दिल्ली
फ़रवरी 25, 2010

हमारी भूमिका

  • कौशल विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहन
  • विभिन्न स्तरों पर साझेदारी का निर्माण
  • निजि क्षेत्र के उद्यमियों के लिए कौशल विकास में सहभागिता की ज़मीन तैयार करना

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