NSDC अपने संसाधनों का इस्तेमाल करते समय इस बात का खास ख्याल रखती है की इससे ज्यादा-से-ज्यादा लाभ लिया जा सके। और इस पहलु को ध्यान में रखते हुए NSDC की यह कोशिश होती है की वह किसी भी उद्यम में सीधे संलग्न न हो बल्कि एक उत्प्रेरक के तौर पर उसे समर्थन करे। NSDC का यह भी प्रयास होता है की कौशल विकास से जुड़े सभी पहलुओं में उद्योग जगत बराबर रूप से शरीक हो। मूलतया NSDC का ये मानना है की वह विभिन्न भागीधारों के साथ मिलकर साझा उपक्रम चलाये और उनके द्वारा पहले से किये जा रहे प्रयासों को और प्रोत्साहन दे, ना की सीधे तौर पर उद्यम में शामिल हो जाये।
सन् 2022 तक 15 करोड़ श्रमिकों के कौशल विकास का जो लक्ष्य NSDC ने तय किया है उसे प्राप्त करने के लिए कई योजनायें बनाई गयी हैं। जिनमे प्रमुख हैं:
- कम लागत तथा उत्तम गुणवत्ता वाले व्यवसायिक मॉडल का विकास
- निजी क्षेत्र की अच्छी-खासी भागीदारी
- यह तय करना की वित्तीय संसाधनों की उपलब्धि मुख्यतया ऋण अथवा भागीदारी
के रूप में हो ना की अनुदान के रूप में ताकि पूँजी का ह्रास ना हो
- इस बात का ख्याल रखना की उद्यमों में NSDC की भूमिका बढे
- मूलधन की वृद्धि का भी ध्यान रखना
उल्लिखित सभी योजनाओं पर अमल हो सके इसके लिए NSDC ने स्वयं के हेतु तीन ख़ास भूमिकाएं तय की है जो इस प्रकार हैं:
- वित्त तथा अन्य वित्तीय प्रोत्साहन:NSDC की ये भूमिका बड़ी महत्त्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत ऋण अथवा भागीदारी के रूप में वित्त की उपलब्धि, अनुदान देना, विभिन्न तरीकों द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराना तथा अन्य तरीकों से वित्तीय समर्थन देने के कार्य आते हैं। किसी एक इकाई को वित्त किस तरीके से उपलब्ध कराना है इसका निर्णय कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे वो मुनाफा कमाने के लिए स्थापित निजी इकाई है, बिना मुनाफे के कार्य करने वाला औद्योगिक संगठन है या फिर बिना मुनाफे के चलने वाली गैर सरकारी संस्था है। भविष्य में NSDC का यह विचार है की वो अनुदान को पूरी तरह से समाप्त कर दे तथा एक व्यापारिक मॉडल को अपना कर NSDC के मूल विचार को आगे बढ़ाये।
- आवश्यक सुविधाओं के लिए रास्ता सुगम करना:कौशल विकास संस्थानों को अपने कार्यों का भली-भाँति पालन करने के लिए कई प्रकार के आवश्यक सुविधाओं की ज़रुरत होती है। ये सुविधाएं है पढाये जाने वाले विषयों का चयन, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण, गुणवत्ता का ध्यान, तकनिकी आधार की रचना, उचित स्थानों पर छात्रों की नियुक्ति तथा अन्य कई सुविधाएं। इन ज़रूरतों की पूर्ति में NSDC भरपूर ध्यान देती है तथा निकट भविष्य में हमारी संस्था इस बात के लिए कटिबद्ध है की औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर गुणवत्ता के मानकों का एक आधार भी तैयार किया जा सके।
- आधारभूत ढाँचे का गठन:NSDC का यह मूल विचार है की कौशल विकास के कार्यक्रमों में निजी क्षेत्रों की ज्यादा-से-ज्यादा भागीदारी हो और इसके लिए हर स्तर पर NSDC अपने संसाधनों द्वारा प्रोत्साहन देने के लिए तैयार है। इस दिशा में NSDC का मुख्य कार्य होगा विभिन्न कौशलों के महत्ता की पहचान, उनके विकास के क्रियान्वन हेतु ढाँचे का निर्माण तथा निजी क्षेत्र के उद्यमियों की इन प्रयासों में ज्यादा-से-ज्यादा संलग्नता सुनिश्चित करना।
क्रियान्वन हेतु मुख्य क्षेत्र
कौशल विकास:सन् 2022 तक 50 करोड़ लोगों को कुशल श्रमिकों की श्रेणी में लाने तथा पहले से कुशल श्रमिकों की कुशलता में वृद्धि करने के लक्ष्य को पाने के लिए कुछ क्षेत्रों पर ध्यान देने की विशेष ज़रुरत है। प्रमुखतः ये क्षेत्र हैं मूलभूत शिक्षा में सभी स्तरों पर सुधार चाहे वो प्राथमिक शिक्षा हो, माध्यमिक हो या फिर उच्च शिक्षा हो। शिक्षण व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ यह भी आवश्यक है की कौशल विकास से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाये इसलिए NSDC की इन पहलुओं पर भी पूरी तत्परता से काम करने की योजना है । बल्कि यूं कहें की निकट भविष्य में इन पूरक क्षमताओं पर हीं विशेष ध्यान देने की योजना है तथा शिक्षण व्यवस्था में कई नए आयाम जोड़ने की भी योजना है।
निजी क्षेत्र के उद्यमों की सहायता:NSDC की मूल विचारधारा हीं यही है की जिस हद तक हो सके वो खुद उद्यम की शुरुआत ना करे बल्कि निजी क्षेत्र के वैसे उद्यम जो कौशल विकास को गंभीरता से ले रहे हैं या जो इस क्षेत्र में कार्यरत हैं उनकी सहायता करे। और इस विचारधारा को वह शिक्षण व्यवस्था में सुधार से लेकर व्यवस्था में नए आयाम जोड़ने तक, सभी क्षेत्रों में लागू करने के लिए कटिबद्ध है। जहाँ तक सहायता का सवाल है तो NSDC मुनाफा कमाने वाली संस्था तथा बिना मुनाफे के कार्य करने वाली संस्था के बीच में कोई भेदभाव नहीं करने वाली है और दोनों को सामान रूप से मदद देने के लिए तत्पर है।
किसी निजी क्षेत्र की इकाई को समर्थन देने से पहले NSDC इस बात को ध्यान में रखती है की वह इकाई किस प्रकार की कुशलता के विकास के लिए कार्यरत है और इसी आधार पर NSDC यह निर्णय लेती है की कैसे उसे समर्थन देना है। विभिन्न आय वर्ग तथा बाज़ार में उपयोगिता को आधार बनाकर NSDC ने समर्थन दिए जा रहे क्षेत्रों को तीन भागों में विभाजित किया है। ये क्षेत्र है:
- स्वतः कार्य करने वाले क्षेत्र:इस क्षेत्र में वैसी इकाईयां आती हैं जिनके द्वारा प्रशिक्षित श्रमिकों के लिए बाज़ार पहले से ही उपलब्ध है। इसलिए NSDC अपनी भूमिका सिर्फ उन्हें और ऊंचे स्तर पर अपना काम करने में मदद करने तक हीं सिमित रखती है।
- थोड़े समर्थन की आवश्यकता वाले क्षेत्र:निकट भविष्य में NSDC की इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की योजना है क्योंकि इस क्षेत्र में क्षमता तो बहुत है परन्तु थोडा-बहुत जोखिम भी है। NSDC अपनी भूमिका इस तरह निभाएगी जिससे निजी क्षेत्र की ज्यादा-से-ज्यादा इकाईयां इसकी ओर आकर्षित हों।
- सफलता की नाउम्मीदी वाले क्षेत्र:NSDC की यह योजना है की सरकार के विभिन्न विभागों के साथ मिलकर वो इस क्षेत्र में कार्यरत इकाईयों का निरिक्षण करे तथा विभिन्न व्यापारिक मॉडलों का प्रयोग करते हुए उन्हें ज्यादा उपयोगिता वाले क्षेत्रों की ओर ले जाये।