बजट भाषण (2008-09) में केंद्रीय वित्त मंत्री ने NSDC की स्थापना की घोषणा करते वक़्त जो शब्द कहे उनसे इसके गठन के पीछे जो मूल विचार हैं उनका पता चलता है। कुछ पंक्तियाँ:
".....एक विश्व स्तरीय कौशल विकास कार्यक्रम मिशन मोड में आरम्भ किये जाने की अत्यधिक आवश्यकता है। इससे विकासशील अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के अनुसार कौशल प्रदान करने की चुनौती का सामना किया जाएगा। मिशन की रूपरेखा और नेतृत्व भी इस प्रकार का होना चाहिए ताकि इसे संपूर्ण देश में शीघ्र क्रियान्वित किया जा सके।"
NSDC का उद्देश्य देश के सन् 2022 तक करीब 50 करोड़ लोगों को विभिन्न प्रकार के कौशलों से अवगत श्रमिकों की श्रेणी में लाने तथा जो कुशल वर्ग में आते हैं उनकी कुशलता में और इजाफा करने के लक्ष्य में करीब 30 % तक का महत्त्वपूर्ण योगदान करने का है जो कि मुख्यतया निजी क्षेत्र से आएगी।
NSDC भारत की ऐसी पहली और एकमात्र संस्था है जिसका मूल उद्देश्य कौशल विकास है और जो निजी तथा सरकारी साझेदारी में काम करने वाली इकाई है। NSDC द्वारा कौशल विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों का एक बड़ा हिस्सा इस बात के लिए समर्पित है की असंगठित क्षेत्रों को इन प्रयत्नों का पूरा लाभ मिले।
कई बार ऐसा होता है की कुछ इकाइयां कौशल के विकास का प्रयास तो करती हैं परन्तु उनसे फायदा लेने हेतु जो वित्त चाहिए होता है उसकी उनके पास कमी होती है। NSDC यह वित्त प्रदान कर उनके लिए उत्प्रेरक का कार्य करती है। निजी तथा सरकारी साझेदारी का एक मॉडल भी तैयार करने में NSDC की बड़ी भूमिका है जिससे निजी इकाईयों को NSDC द्वारा समर्थन देने तथा उनके साथ समन्वय बिठाने में मदद मिलेगी।
NSDC 21 भिन्न-भिन्न क्षेत्रों पर एकाकी रूप से ध्यान केन्द्रित करती है जिससे प्रत्येक सेक्टर की क्षमता को समझने तथा उसमे निजी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
कम्पनिस् एक्ट के सेक्सन 25 के तहत NSDC वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली एक ऐसी कम्पनी है जो बगैर लाभ के काम करतीं है। इसकी मूल पूंजी 10 करोड़ रुपये है जिसमे से 49 प्रतिशत शेयर सरकार के पास है तथा 51 प्रतिशत निजी क्षेत्र के पास है।
संपूर्ण पारदर्शिता तथा निर्णय लेने की उच्च क्षमता जैसे मापदंडों पर NSDC खरा उतरे इसके लिए इसे एक स्वायत संस्था के रूप में गठित किया गया है। इसके निर्णय लेने की प्रक्रिया को कई स्तरों पर विभाजित किया गया है जिससे हर निर्णय पूरी तरह से जांचा परखा हो। ये स्तर हैं:
उल्लिखित प्रत्येक स्तर की NSDC के क्रियान्यवन में अपनी भूमिका है। इन स्तरों के कार्यकर्ता इस तरह अपनी रणनीति बनाते हैं की NSDC की मूल निति पूरे प्रभावकारी ढंग से लागू हो। वो इस बात का भी ख्याल रखते हैं की संस्था की लोच बरकरार रहे ताकि निजी क्षेत्रों के कौशल विकास में सहभागिता करने में कोई रुकावट नहीं हो।
निदेशल मंडल में 12 सदस्य शामिल होते हैं जिनमे से 4 सरकार द्वारा मनोनीत किये जाते हैं तथा बाकी 8 निजी क्षेत्र से आते हैं जिनमे चेयरमैन का पद भी शामिल है। NSDC के निर्णायक स्तरों में एक प्रमुख स्तर है NSDF जिसके 100 प्रतिशत स्वामित्व सरकार के पास हैं और यह पूर्णतया पेशेवर प्रबंधकों द्वारा संचालित होती है। इस वजह से यह फायदा होता है की NSDC अपने मूल विचार से विचलित नहीं होती।
हमारी भूमिका